रातोंरात दौलत

डाउनलोड <रातोंरात दौलत> मुफ्त के लिए!

डाउनलोड करें

अध्याय 06 राइडर शौचालय को साफ करता है

टिम अपनी फ़ोन स्क्रीन को घूरता रहा, आँखें फटी की फटी रह गईं। “मुझसे मज़ाक कौन कर रहा है?!”

उसे झट से याद आया कि मैसेज में उसे ‘बेवकूफ़’ कहा गया था, और उसने ग्रुप में राइडर को @ करके लिख दिया: “तू कौन है?!”

जिन क्लासमेट्स ने पैसे लपके थे, रकम देखकर दंग रह गए—किसी-किसी ने तो पाँच हज़ार डॉलर से भी ज़्यादा उठा लिए!

टिम ने सबसे कम रकम पकड़ी और बेइज़्ज़ती भी उसी की हुई—उल्टा खुद ही अपने लिए अपशब्द लिखने पड़ गए।

पैसा मज़ेदार था, पर क्लास प्रेसिडेंट को नाराज़ करना ठीक नहीं था। सबने अपने-अपने मैसेज वापस ले लिए—सिवाय उन कुछ के, जिन्होंने चैट देखी ही नहीं थी।

“टिम बेवकूफ़ है!” वाले सात-आठ मैसेज अब भी पड़े रह गए।

ग्रुप का माहौल तना हुआ था। सबको दिख रहा था कि कोई जानबूझकर टिम को निशाना बना रहा है—पर किसी को नहीं पता था कि पैसे किस व्हाट्सऐप अकाउंट से भेजे जा रहे हैं।

उसी वक्त राइडर ने ग्रुप चैट में फिर पैसे ट्रांसफर कर दिए। इस बार शर्त थी: “मैं टिम का पापा हूँ!”

ग्रुप चैट में धमाका हो गया:

“मैं टिम का पापा हूँ!”

“मैं टिम का पापा हूँ!”

“मैं टिम का पापा हूँ!”

टिम ग़ुस्से से आग-बबूला हो गया और फिर राइडर को @ किया: “तू है कौन, कमीने?! तू गया!”

राइडर ने अनदेखा किया और एक और रेड एन्वेलप भेज दिया: “टिम का बेटा बेवकूफ़ है!”

क्लासमेट्स को तुरंत समझ आ गया—ग्रुप में कोई बड़ा आदमी टिम को चिढ़ा रहा है! मुफ्त के पैसे कौन छोड़े? यहाँ तक कि आम तौर पर चुप रहने वाले क्लास टीचर, मिस्टर ब्लेयर भी कूद पड़े!

स्क्रीन पर मैसेजों की बाढ़ आ गई:

“टिम का बेटा बेवकूफ़ है!”

“टिम का बेटा बेवकूफ़ है!”

“टिम का बेटा बेवकूफ़ है!”

रेड एन्वेलप पर रेड एन्वेलप आते रहे:

“टिम, गुस्सा है तो आकर काट ले!”

“टिम, गुस्सा है तो आकर काट ले!”

मैसेज इतने तेज़ी से ऊपर सरक रहे थे कि कोई उन्हें वापस लेने की फुर्सत ही नहीं पा रहा था। सब पैसे लपकने में लगे थे।

पूरी चैट टिम को गाली देने से भर गई—ज़्यादातर बेहद घटिया।

विडंबना ये थी कि टिम ने अपना ऑटो-रिप्लाई बंद ही नहीं किया था। तो सबके साथ-साथ वो खुद भी खुद को गालियाँ दे रहा था।

और उससे भी ज़्यादा ज़िल्लत—हर बार उसके हिस्से में सबसे छोटा रेड एन्वेलप ही आता।

राइडर ग्यारहवाँ रेड एन्वेलप भेजने ही वाला था कि एक नोटिफिकेशन उछला: “आपको ग्रुप चैट से हटा दिया गया है!”

राइडर समझ गया। अंदाज़ा लगाने की ज़रूरत नहीं—ये टिम ही था!

उसने इस शरारत में दो लाख डॉलर उड़ा दिए थे, पर उसे ज़रा भी फर्क नहीं पड़ा। मज़ा आ गया था।

“पैसा होना ही असली खुशी है…” राइडर बेख़याली में बुदबुदाया।

तभी उसकी नज़र बैंक ट्रांसफर नोटिफिकेशन पर पड़ी।

और उसकी पत्नी, सारा का एक व्हाट्सऐप वॉइस मैसेज आया:

“मैं तुम्हें तीन लाख पचास हज़ार डॉलर ट्रांसफर कर रही हूँ। ये मेरी सारी बचत है। एवा को बचाने में लगाना। मेरी माँ को मत बताना। अपना ख़याल रखना।”

लहजा अब भी ठंडा था, मगर राइडर के दिल में कुछ गरम-सा उतर गया। सारा चाहे जितनी बेरुखी दिखाए, अंदर ही अंदर उसे अब भी उसकी परवाह थी।

“इतने साल शादी हो गए, मैंने उसे कभी कोई तोहफ़ा नहीं दिलाया। अब जब पैसे हैं, तो उसका हक़ ठीक से चुकाऊँगा।”

राइडर कंपनी से निकला और शहर की सबसे बड़ी ज्वेलरी शॉप में गया, एक हार खरीद लिया।

उसने सारा के लिए हीरे का हार खरीदा—जिसका नाम था “सबसे सच्चा प्यार,” कीमत थी साठ लाख डॉलर। राइडर ने पलक तक नहीं झपकाई।

फिर उसने टैक्सी ली, सोचकर कि खुद जाकर उसे देगा।

लेकिन जब वो पेरिस बे इलाक़े में सारा के घर के नीचे पहुँचा…

वो यूनिट के एंट्रेंस की तरफ बढ़ा और बाहर एक काली पोर्श खड़ी देखी।

नंबर प्लेट देखते ही राइडर का ग़ुस्सा फट पड़ा।

ये पोर्श सैम की थी—वही हिट-एंड-रन करने वाला ड्राइवर!

जॉनसन परिवार का ड्रॉइंग रूम

वहाँ रौनक थी।

स्मिथ ग्रुप का वारिस, सैम, मिलने आया था!

“अंकल, आंटी, बस एक छोटा-सा तोहफ़ा, मेरी तरफ से आदर का निशान।” सैम सोफ़े पर इत्मीनान से बैठा था।

कॉफ़ी टेबल पर 1982 शातो लाफ़ित की दो बोतलें और महँगे जापानी कॉस्मेटिक्स का एक बॉक्स रखा था।

“1982 लाफ़ित! एक बोतल की कीमत ही हज़ारों-हज़ार डॉलर! कितना महँगा!” अर्नेस्ट तुरंत फोटो खींचकर ‘मोमेंट्स’ पर डालना चाहता था, ताकि अपने पुराने दोस्तों के सामने शान बघार सके।

करेन उसकी तारीफ़ करते-करते थक ही नहीं रही थी। “सैम कितना काबिल है। विदेश में पढ़ा है, कितनी अच्छी परवरिश है—मेरे घर के उस निठल्ले की तरह नहीं। उसका खयाल आते ही मेरा खून खौल जाता है!”

“आंटी, आप तो मुझे ज़्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर कह रही हैं।” सैम ने आत्मसंतोष भरी मुस्कान के साथ कहा। उसने जेब से एक बेहद नफ़ीस गिफ्ट बॉक्स निकाला। “ये सारा के लिए है।”

उसने डिब्बा खोला।

अंदर हीरे का हार था, छोटे-छोटे हीरे झिलमिला रहे थे।

करेन की आँखें चमक उठीं। “इतने बड़े हीरे! ये तो बहुत महँगा होगा!”

सैम की आँखों में चालाकी की झलक लहराई। उसने यूँ दिखाया जैसे कोई बड़ी बात ही नहीं। “एक लाख डॉलर। जेबखर्च।”

उसने हार सारा की तरफ बढ़ाया—और उसकी आँखों में लालच साफ झलक रहा था।

असल में वह कॉलेज में सारा से सीनियर था। तब उसने कई बार उसका पीछा किया था, मगर सारा ने हर बार उसे ठुकरा दिया।

ग्रेजुएशन के बाद वह पढ़ाई के लिए विदेश चला गया। लौटकर जब उसे पता चला कि सारा की शादी हो चुकी है, तो वह गुस्से से तिलमिला उठा।

और जब उसने सुना कि उसका पति कंगाल है, तो उसका गुस्सा और भड़क गया।

सैम एक महीने पहले ही ह्यूस्टन वापस आया था। दोस्तों से उसे पता चला कि सारा और राइडर तलाक लेने वाले हैं।

सैम तुरंत समझ गया इसका क्या मतलब है। अगले ही दिन वह तोहफ़े लेकर दरवाज़े पर हाज़िर हो गया!

सारा झुंझलाहट महसूस कर रही थी। उसे राइडर की औसतियत और बे-हमती नापसंद थी।

अगर उसने उससे शादी न की होती, तो उसकी ज़िंदगी कहीं बेहतर हो सकती थी। फिर भी, वह सैम के बजाय राइडर को ही चुनेगी।

राइडर भले ही किसी काम का न हो, पर वह ईमानदार और सीधा-सादा था। सैम? कॉलेज में उसने अपने पैसों के दम पर न जाने कितनी लड़कियों के साथ खेल किया था, और उसके किस्से-कांड कभी खत्म ही नहीं होते थे।

वह ऐसे कमीने से कोई वास्ता नहीं रखना चाहती थी।

इसलिए उसने साफ़ मना कर दिया, “मुझे नहीं चाहिए। किसी और को दे दो।”

सैम का चेहरा उतर गया और उसने करेन की तरफ गिड़गिड़ाती नज़र से देखा।

करेन तुरंत बीच में कूद पड़ी, “ये सैम की तरफ से इतने मन से लाया हुआ तोहफ़ा है, रख लो। ज़रा सोचो—तीन साल की शादी में तुम्हारे उस निकम्मे पति ने तुम्हें क्या दिलाया है?”

“हूँह! ये हार तो वो सारी उम्र में भी नहीं खरीद सकता!”

कहते-कहते उसने डिब्बा उठाया और सारा के हाथों में ठूँस दिया।

फिर उसने सैम का हाथ थाम लिया और गंभीर होकर बोली, “सारा कुछ दिनों में तलाक ले रही है। उसे कहीं घुमाने ले जाओ, मन हल्का हो जाएगा—हवाई ठीक रहेगा। देखो, मैं बूढ़ी हो रही हूँ और मुझे नाती-पोते चाहिए। सैम, मेरा मतलब समझ रहे हो न?”

सैम ने गला सूखा-सा निगला और बार-बार सिर हिलाया। “समझ गया! बिल्कुल समझ गया!”

सारा ने हार का डिब्बा सोफे पर पटक दिया और भौंहें चढ़ाईं। “माँ, मैंने कब कहा कि मैं राइडर से तलाक ले रही हूँ!”

करेन ने उसे घूरा। “क्यों नहीं? उस कचरे को ढोने का क्या मतलब?”

सारा ने नज़रें झुका लीं और बुदबुदाई, “ये मेरी शादी है। फैसला मैं खुद करूंगी।”

करेन का पारा चढ़ गया। “तीन साल पहले तुमने ज़िद करके उसे घर-जमाई बना लिया, ऊपर से उसकी उस निकम्मी बहन को भी साथ ले आईं। देखो, इस परिवार का क्या हाल कर दिया! दूसरों के दामाद घर-गाड़ी लेते हैं। और वो? उसमें तो कोई उम्मीद ही नहीं!”

अर्नेस्ट ने चश्मा ठीक किया और समझाया, “तुम्हारी माँ सही कह रही है। अच्छी शादी की बुनियाद पैसे पर होती है। राइडर कमाई ही नहीं कर पाता!”

सैम भी हामी भरते हुए बोला, “सारा, तुम्हारी उस घटिया आदमी से शादी की बातें मैंने सब सुनी हैं। वो समाज का सबसे निकृष्ट इंसान है। वो तुम्हारे लायक नहीं! मैं बताता हूँ, उसने जान-बूझकर तुमसे शादी की! पैसों के लिए वो कुछ भी कर सकता है!”

सैम ऐसे बोल रहा था जैसे सब कुछ वही जानता हो। “मैंने उसके जैसे बहुत देखे हैं!”

सारा सुनती रही, सोच में डूबती चली गई।

“क्या राइडर सच में इतना बेदिल है?” उसके मन में सवाल उठा।

उसी पल दरवाज़ा खुला। राइडर घर आ गया।

करेन ने जैसे ही उसे देखा, चेहरे पर घृणा उतार आई और वह ताने के साथ बोली, “रात भर बाहर—भगवान जाने कहाँ मुँह मार रहे थे! अच्छा हुआ, सही वक्त पर लौट आए। तुम और सारा तलाक ले रहे हो, फैसला हो गया!”

पिछला अध्याय
अगला अध्याय